मंडे तक फिल्म फ्लॉप...', धुरंधर 2 की बुराई कर रहा था बॉलीवुड! इस डायरेक्टर ने खोली इंडस्ट्री की पोल

बॉलीवुड में एक फिल्म के सफल होने के पीछे केवल बजट या सितारे नहीं होते, बल्कि दर्शकों का support और उसकी कहानी का दम होता है। फिल्म 'धुरंधर 2' के साथ ऐसा ही हुआ, जहां बड़े-बड़े निर्देशकों ने इसे लेकर यह कहा कि 'मंडे तक फिल्म फ्लॉप हो जाएगी'। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बल्कि, फिल्म ने सोमवार के बाद भी तेजी से collection बढ़ाया। इसके पीछे एक ऐसा राज छिपा है जिसे अब डायरेक्टर कुणाल कोहली ने खुलासा किया है।

कुणाल कोहली ने कहा कि इंडस्ट्री के कई प्रमुख निर्माता और निर्देशक इस फिल्म की सफलता के खिलाफ bet लगा चुके थे। उनका मानना था कि रणवीर सिंह की इस फिल्म का प्रभाव केवल पहले सप्ताह तक सीमित रहेगा। 'मैंने जब बड़े डायरेक्टर्स से बात की, तो उन्होंने कहा—सोमवार को यह फिल्म बैठ जाएगी', कोहली ने बताया। लेकिन reality कुछ और थी: फिल्म ने दर्शकों के दिल पर राज किया और बॉक्स ऑफिस पर नया इतिहास रचा।

फिल्म ने सिर्फ एक दिन में 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की earning की, और बाद में भी इसकी गति नहीं रुकी। 'धुरंधर' ने भारतीय सिनेमा की असली strength दिखाई—वह ताकत जो देसी कहानियों, राष्ट्रीय भावनाओं और एक मजबूत नायक में छिपी है। कुणाल कोहली ने कहा कि हमें पश्चिमी विषयों के पीछे भागने की बजाय अपनी जमीन की कहानियां बनानी चाहिए।

उन्होंने 'सैयारा' और 'धुरंधर' जैसी फिल्मों की तारीफ करते हुए कहा कि हिंदी सिनेमा के नायक को 'मर्द' होना चाहिए—एक आदमी जो confused या खोया हुआ न हो, बल्कि अपने मिशन पर अडिग रहे। इस फिल्म ने यह भी दिखाया कि जब निर्माता असली भावनाओं को छूते हैं, तो दर्शक खुद-ब-खुद सिनेमाघरों का रुख करते हैं। public trust बनाना और उसे बनाए रखना ही असली सफलता की कुंजी है।

प्रतिक्रियाएँ 6

  • अमन_दिल्लीवाला

    ये बात सच है, जब फिल्म असली भावनाओं को छूती है, तो लोग automatically रिस्पॉन्स करते हैं।

  • प्रिया_मुंबई

    कुछ डायरेक्टर्स को लगता है कि वे ट्रेंड सेटर हैं, लेकिन public का दिल जीतना अलग बात है।

  • राज_फिल्मी

    मैंने 'धुरंधर' को देखा। रणवीर ने performance दी है जो दिल को छू गई।

  • मोहित_पंजाबी

    इंडस्ट्री के कुछ लोगों का रुख अक्सर नकारात्मक होता है। वे किसी की success नहीं चाहते अगर वो उनके नेटवर्क में नहीं है।

  • नीतू_माँ

    मैं हमेशा सोचती हूं कि फिल्मों में एक मजबूत नायक क्यों नहीं होता? अब तो real hero वापस आ रहा है।

  • विकास_थिएटर

    क्या इंडस्ट्री का बायकॉट वाकई कभी किसी फिल्म को रोक सकता है? box office तो दर्शकों के हाथ में है।

यह लेख तथ्यों पर आधारित है और अंग्रेज़ी सीखने के लिए पुनर्रचित किया गया है; पाठक प्रतिक्रियाएँ विविध दृष्टिकोणों के उदाहरण हैं।

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