वैज्ञानिक हैरान: 'असंभव' ग्रह खोजा गया, जो भौतिकी के नियम तोड़ रहा है
वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष में एक ऐसा एलियन ग्रह खोजा है जो न केवल असामान्य है, बल्कि ग्रह निर्माण के established theories को ही चुनौती देता है। ग्रह का नाम है TOI-5205 b, और यह इतना विषम है कि इसे 'फॉरबिडन' कहा जा रहा है—यानी ऐसा ग्रह जो बन ही नहीं सकता था। लेकिन वह वहाँ है।
इसकी सबसे बड़ी विसंगति यह है कि यह आकार में Jupiter जितना बड़ा है, लेकिन एक छोटे-से लाल बौने तारे की परिक्रमा कर रहा है। सामान्य ग्रह निर्माण के मॉडल के मुताबिक, इतने छोटे तारे के आसपास इतना बड़ा ग्रह बनना लगभग असंभव है। यह वैज्ञानिकों के समझ की सीमाओं को धक्का दे रहा है।
जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप ने इस ग्रह के वातावरण का विस्तृत अवलोकन किया है, और परिणाम और भी रोचक हैं। वैज्ञानिकों को इसके वातावरण में methane और हाइड्रोजन सल्फाइड जैसी दुर्लभ यौगिक मिले हैं। और सबसे हैरानी की बात यह है कि भारी तत्वों की मात्रा बहुत कम है।
वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस ग्रह के भीतर कोर में भारी तत्व इतने गहरे डूब गए हैं कि वे outer layers में लगभग अदृश्य हैं। यह इस ग्रह के विकास को समझने में मदद कर सकता है, लेकिन यह सवाल भी खड़ा करता है कि ऐसा ग्रह बना कैसे?
इस खोज से साफ है कि ब्रह्मांड की ब्रह्मांडीय नियमावली हमारी किताबों में लिखे नियमों से कहीं ज्यादा लचीली हो सकती है। TOI-5205 b न केवल एक अजीब ग्रह नहीं है—यह एक scientific challenge है, जो बताती है कि अभी हमने ब्रह्मांड के रहस्यों में से बहुत कम समझे हैं। और जैसे-जैसे नए टेलीस्कोप लॉन्च होंगे, शायद हम और भी ‘असंभव’ चीजों से मिलेंगे।
ये तो बिल्कुल प्लॉट ट्विस्ट है! कोई massive planet विशाल ग्रह छोटे तारे के पास? क्या यह किसी विज्ञान कथा का सीन है?
मीथेन और हाइड्रोजन सल्फाइड? ओह, तो यह बदबू वाला ग्रह है! space vacation अंतरिक्ष छुट्टी का सपना तो अब मुर्दे जैसी गंध में डूब गया।
मैं हमेशा सोचती थी कि भौतिकी के नियम अटल होते हैं। लेकिन अब लगता है ब्रह्मांड खुद उन्हें rewriting फिर से लिख रहा है।
जेम्स वेब टेलीस्कोप सचमुच खेल बदलने वाला है। बिना इसके, ये सब invisible अदृश्य रहता। क्या अगला ग्रह ऑक्सीजन से भरा मिलेगा?
अगर ये ग्रह बन सकता है, तो ग्रह निर्माण मॉडल में कोई न कोई चूक है। क्या वैज्ञानिक rewriting textbooks पाठ्यपुस्तकें फिर से लिख रहे हैं?
मैं तो सोच रही थी पृथ्वी जैसे ग्रह ढूंढने में वक्त लगेगा। लेकिन ये ‘असंभव’ ग्रह तो पहले ही mind blown दिमाग उड़ा रहा है।
क्या यह ग्रह का प्रवास हो सकता है? शायद यह बाद में इस orbit कक्षा में आया? वैज्ञानिकों को गतिशीलता पर नजर डालनी चाहिए।
ब्रह्मांड तो ऐसा लगता है जैसे ब्रह्मांडीय जादूगर हो। हर बार नया trick करतब दिखाता है। आज निषिद्ध ग्रह, कल क्या?