पाकिस्तान का लेबनान दावा झूठा: वेंस ने बताया असली सच, इंटरनेशनल स्टेज पर फंसी शाहबाज की छवि
पाकिस्तान की विदेश नीति को लेकर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय बेइज्जती का सामना करना पड़ा है, जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ के एक दावे को सीधे तौर पर refuted कर दिया। शरीफ ने कुछ ही दिन पहले एक सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया था कि हालिया युद्धविराम में लेबनान भी शामिल है, लेकिन वेंस ने कहा कि ऐसा कभी नहीं हुआ।
बुधवार को प्रेस ब्रीफिंग में वेंस ने साफ कहा, गलतफहमी हुई है। उनका कहना था कि शायद ईरानियों को लगा कि लेबनान इस समझौते का हिस्सा है, लेकिन अमेरिका ने कभी भी ऐसा promise नहीं किया था। इस सीधे विरोधाभास ने पाकिस्तान की कूटनीतिक विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
लेबनान के मुद्दे पर तो साफ हो गया है कि वह किसी औपचारिक शांति समझौते का हिस्सा नहीं है, लेकिन यह विवाद बड़े संदर्भ में आया है। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच गहरे मतभेद बने हुए हैं, जहाँ से दुनिया का बहुत हिस्सा तेल आपूर्ति प्राप्त करता है। इस अनिश्चितता ने global energy markets में अस्थिरता पैदा कर रखी है।
इस बीच, पाकिस्तान लगातार यह दावा कर रहा है कि इस्लामाबाद की मध्यस्थता से पश्चिम एशिया में शांति संभव हुई है। लेकिन तथ्य यह हैं कि वास्तविक वार्ता अमेरिका, ईरान, सऊदी अरब और इजरायल जैसे प्रमुख शक्तियों के बीच हो रही है। हाल के महीनों में गाजा और यमन जैसे मुद्दों पर भी पाकिस्तान ने अपनी सक्रिय भूमिका का दावा किया था, लेकिन किसी भी Western capital ने इसे औपचारिक मान्यता नहीं दी।
कूटनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान घरेलू राजनीति और मुस्लिम दुनिया में अपनी image सुधारने के लिए ऐसे बयान जारी करता है। एक चर्चा यह भी है कि शाहबाज शरीफ का वह ट्वीट, जिसमें लेबनान का जिक्र था, शायद वाशिंगटन से ड्राफ्ट किया गया था, और फिर गलती से या इरादतन गलत सूचना फैल गई।
अब सवाल यही है कि आगामी शनिवार को इस्लामाबाद में होने वाली शांति वार्ता कितनी सारगर्भित होगी, जबकि असली ताकतें दूसरे एजेंडे पर चर्चा कर रही हैं। वेंस का बयान ने साफ कर दिया कि वाशिंगटन पाकिस्तान के दावों पर does not believe । क्या यह बैठक सिर्फ एक प्रतीकात्मक चाल है, या वास्तव में क्षेत्र में शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगी?
लेबनान को ceasefire युद्धविराम में शामिल करने का दावा करना? ये किसी कॉमेडी शो का स्क्रिप्ट लग रहा था।
पाकिस्तान विदेश नीति में बस थिएटर कर रहा है। असली power dynamics शक्ति संतुलन तो दूसरी जगह तय हो रहा है। कोई गंभीर खिलाड़ी उन्हें सीरियस नहीं ले रहा।
गाजा, यमन, लेबनान — हर जगह पाकिस्तान का नाम घसीट रहे हैं, लेकिन सबूत कहीं नहीं। क्या ये सब propaganda प्रचार नहीं, तो और क्या है?
जेडी वेंस ने शालीनता से टोन डाउन किया, लेकिन उनका मतलब साफ था — पाकिस्तान बातचीत की main table मुख्य मेज पर नहीं है। वो पीछे के रास्ते पर भी नहीं है।
शाहबाज शरीफ ने शायद अच्छे इरादों से ट्वीट किया, लेकिन अगर वाशिंगटन ने draft ड्राफ्ट भेजा था, तो क्या उनके टीम ने चीजों को गलत समझा?
मुस्लिम देशों में इमेज बचाने के लिए ये सब दिखावा है। अंदर से weak कमजोर हैं, बाहर मजबूत दिखना चाहते हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य नहीं खुला, तेल की कीमतें अभी भी डगमगा रही हैं। पाकिस्तान शांति की बात कर रहा है, लेकिन real crisis असली संकट तो ऊर्जा सुरक्षा में है।
इस्लामाबाद में बैठक होगी तो होगी, लेकिन जब तक मुख्य खिलाड़ी एक साथ नहीं बैठेंगे, peace शांति की उम्मीद कम ही है। चाय पर चर्चा, लेकिन लड़ाई जारी।