140 डॉलर तक तेल? ईरान-अमेरिका की जंग में भारत की जेब पर कौन सा बोझ आएगा

दुनिया के energy बाजार में एक नाटकीय tension चल रहा है — ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघर गालिबफ ने prediction की है कि अगर तेल की आपूर्ति पर दबाव बना रहा, तो कच्चा तेल 140 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है। यह warning अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की होर्मुज जलडमरूमध्य में नाकेबंदी की धमकी के बाद आई है, जिसके बाद वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें 120 डॉलर तक छू गई हैं। ईरान का दावा है कि वह दशकों के प्रतिबंधों के बावजूद आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था बनाने में कामयाब रहा है और अब आर्थिक pressure को झेलने की पूरी क्षमता रखता है।

इस crisis का सीधा असर तेल आयात करने वाले देशों पर पड़ रहा है। ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 6 प्रतिशत की छलांग आई है, जो जून 2022 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। टोक्यो के बाजार में तेल के भाव में 6.77 डॉलर की increase दर्ज की गई। ट्रंप के दावे कि ईरान के तेल कुएं फट जाएंगे, को mockery में उड़ाते हुए गालिबफ ने कहा, 'तीन दिन हो गए, कोई कुआं नहीं फटा।' उन्होंने यहां तक कहा कि वे 30 दिन तक इंतजार कर सकते हैं और लाइवस्ट्रीम भी दिखा सकते हैं। यह अलंकारिकता अमेरिकी प्रशासन की नीतियों पर ईरान के विश्वासघात को उजागर करती है।

भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए यह scenario चिंता का विषय है। हर एक डॉलर की बढ़ोतरी से भारत का वार्षिक आयात बिल 2 अरब डॉलर (18 हजार करोड़ रुपये) तक बढ़ जाता है। अगर कीमत 140 डॉलर तक पहुंच गई, तो बिल पर 80 से 100 अरब डॉलर का अतिरिक्त burden आ सकता है। इसका प्रभाव सीधे महंगाई दर पर पड़ेगा: 10 प्रतिशत तेल महंगा होने से खुदरा महंगाई में 40 bps और थोक महंगाई में 80 bps की वृद्धि देखी जाती है। यह spiral सामान्य उपभोक्ता तक पहुंचकर जीवनयापन की लागत बढ़ाएगा।

अमेरिका की रणनीति स्पष्ट है: नाकेबंदी के जरिए ईरान को तेल निर्यात करने से रोककर उसके revenue में कटौती करना। लेकिन गालिबफ का तंज है कि यह नीति नाकाम रही है और वास्तव में तेल की price को 120 डॉलर से ऊपर धकेल रही है। उन्होंने ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट को ऐसी नीतियों का जिम्मेदार ठहराया, जो boycott को बढ़ावा देते हैं। इस conflict में ईरान अपने economy की मजबूती पर भरोसा जता रहा है, जबकि वैश्विक बाजार अस्थिरता के कगार पर है।

प्रतिक्रियाएँ 6

  • राजधानी_की_चिंता

    अगर तेल के दाम इतने बढ़े, तो आम आदमी की जेब पर impact कैसे नहीं पड़ेगा?

  • गली_का_जानकार

    अमेरिका ने नाकेबंदी की, लेकिन क्या उन्हें पता है कि इसका असली cost दुनिया भर के लोग उठा रहे हैं?

  • तेल_से_तरोताजा

    ईरान के बयान में जवाबी confidence झलक रहा है।

  • महंगाई_में_मारा

    हर बार तेल महंगा होता है, और हमारी सरकार कहती है, 'हम कदम उठा रहे हैं'। लेकिन महंगाई तो चली जाती है।

  • नीति_की_खोज

    क्या असली लड़ाई तेल में है या वैश्विक power के संतुलन में?

  • सोच_समझकर

    गालिबफ का लाइवस्ट्रीम वाला मजाक सिर्फ मजाक नहीं, एक message है।

यह लेख तथ्यों पर आधारित है और अंग्रेज़ी सीखने के लिए पुनर्रचित किया गया है; पाठक प्रतिक्रियाएँ विविध दृष्टिकोणों के उदाहरण हैं।

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